LPG e-KYC की डेडलाइन बढ़ी, अब 23 अगस्त तक कराएं KYC; करोड़ों गैस ग्राहकों को राहत

नई दिल्ली
एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। ई-केवाईसी की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया गया है। अब आखिरी तारीख 23 अगस्त है। इससे पहले केवाईसी करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त थी। रिपोर्ट के अनुसार यह अतिरिक्त समय ऐप में आ रही असुविधा सहित अन्य कारणों की वजह से दिया गया है। लास्ट डेट के करीब आने के बाद एलपीजी एजेसींज पर लम्बी लाइनें देखी जा रही थी।
रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल राहत भले ही मिल गई है। लेकिन 23 अगस्त की नई डेडलाइन में भी ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर आने वाले समय में ग्राहकों के बीच हलचल रहने वाली है।
क्या आ रही थी समस्या
यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल आधारित है। ऐसे में सर्वर धीमा होने की वजह से प्रक्रिया पूरा होने में समय लग रहा था। जिसकी वजह से भीड़ बढ़ रही थी। वहीं, ऐप का भी रिस्पॉन्स बहुत अच्छा नहीं था।
क्यों हो रही है ई-केवाईसी
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां उपभोक्ताओं से जुड़ी सभी जानकारी को अपडेट करना चाह रही है। जिससे कालाबाजारी को रोका जा सके। वहीं, कुछ ग्राहकों का मोबाइल नंबर अपडेट नहीं है। जिसकी वजह से वो सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पर रहे है। ऐसे में ई-केवाईसी की प्रक्रिया के दौरान वो नया मोबाइल नंबर भी अपडेट करवा पाएंगे। बता दें, युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद से सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े नियमों को काफी सख्त कर दिया है।
ओटीपी के जरिए हो रही है डिलीवरी
एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी अब ओटीपी आधारित हो गई है। ग्रामीण इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग 45 दिन पर और शहरों में 25 दिन पर हो रही है। बता दें, भारत एलपीजी बाहर से आयात करता है। युद्ध से पहले अधिकतर हिस्सा खाड़ी के देशों से ही मंगाया जाता था। लेकिन युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया। जिसके बाद देश की आपूर्ति प्रभावित हुई। मौजूदा समय में भारत अपनी एलपीजी जरूरतों के लिए अमेरिका सहित अन्य देशों पर निर्भर है।
सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को दिया टारगेट
देश की रिफानरी कंपनियों को भी एलपीजी प्रोडक्शन के लिए टारगेट दिया गया है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी रिलायंस के ऊपर है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 13 अगस्त के आदेश के तहत 21 रिफाइनरी और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन का तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) उत्पादन क्षमता निर्धारित की गई है। यह 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के घरेलू एलपीजी उत्पादन का दोगुना से भी अधिक है। साथ ही यह आंकड़ा देश की 70 प्रतिशत दैनिक खपत के बराबर है।



