हरियाणा में कचरे से बनेगी बिजली, हिसार में लगेगा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट

हिसार.
हरियाणा के हिसार में कचरे से बिजली बनाने की योजना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के नजदीक ढंढूर गांव में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (OGEL) की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने जमीन का निरीक्षण किया है।
इस परियोजना के तहत कचरे से 5 से 10 मेगावाट बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने प्रस्तावित स्थल की स्थिति देखी और तकनीकी जानकारी जुटाई। इस दौरान नगर निगम की टीम भी एक्सईएन जयवीर डूडी के नेतृत्व में मौजूद रही। यह कार्रवाई निगमायुक्त सी. जयाश्रद्धा के मार्गदर्शन में की गई।
जमीन की मिट्टी की होगी जांच, फिर आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट
जमीन का निरीक्षण पूरा होने के बाद अब मिट्टी की जांच करवाई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्लांट की स्थापना से जुड़ी अगली तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। योजना के अनुसार, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद और भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र से आने वाले कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। इससे कई क्षेत्रों के ठोस कचरे के निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद है।
15 एकड़ जमीन मिली, कचरा प्रोसेसिंग के लिए ₹9.93 करोड़ का टेंडर
प्रस्तावित परियोजना के लिए राजकीय पशुधन फार्म की 55 एकड़ भूमि में से 15 एकड़ जमीन लीज पर उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा कचरे की प्रोसेसिंग से जुड़े काम के लिए मेरठ की एक एजेंसी को 9.93 करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया है। यह राशि कचरा प्रोसेसिंग के काम से संबंधित बताई गई है, इसे पूरे बिजली प्लांट की कुल लागत नहीं समझना चाहिए। जमीन का निरीक्षण करने पहुंची ओजीईएल की टीम ने निगमायुक्त सी. जयाश्रद्धा के साथ बैठक भी की। बैठक में परियोजना की तैयारियों और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
चिकनवास सब स्टेशन से जुड़ेगा प्लांट, बिछेगी 10 किलोमीटर लाइन
प्रस्तावित प्लांट से तैयार होने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, प्लांट को चिकनवास के 220 केवी सब स्टेशन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए करीब 10 किलोमीटर लंबी 33 केवी बिजली लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। एचवीपीएनएल के एक्सईएन सत्यप्रकाश के नेतृत्व में चिकनवास सब स्टेशन तैयार होने की जानकारी दी गई है। हिसार का यह वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू होने पर कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ बिजली उत्पादन में भी मदद मिल सकती है। फिलहाल परियोजना जमीन की जांच और तकनीकी तैयारियों के चरण में है। प्लांट के निर्माण और बिजली उत्पादन शुरू होने की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।



